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 Swami Akhilwshwaranand Giriji Mahraj in Gao-Shala
भारत की आर्थिक समृद्धि का मुख्य आधार गोवंश है, गोवंश की रक्षा करना भारतीयों का संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार है।

- महामण्डलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानन्द गिरि
गावो विश्वस्यः मातरः
गाय और सम्पूर्ण गोवंश की रक्षा भारतीय संस्कृति के संरक्षण के प्रयत्नों का मुख्य आधार है। गाय पशु आकार में मात्र पशु ही नहीं, ठीक वैसे ही जैसे भारत केवल एक भूखण्ड ही नहीं अपितु एक जीवन्त चेतना है। गाय का सम्बन्ध हमारे परिवार से वैसे ही है जैसे परिवार के किसी सदस्य का । गाय का सम्बन्ध भारतीय अर्थव्यवस्था से ठीक वैसे ही है जैसे किसी व्यपारी का वित्त से। गाय का सम्बन्ध कृषि की अभिवृद्धि से, पर्यावरण के रक्षण से है। भारत की आर्थिक समृद्धि का मुख्य आधार कृषि और कृषि का आधार गोवंष तथा गोवंष रक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण पर आधारित है वर्षा। वर्षा भी विज्ञान के सिद्धान्तों पर आधारित है। विज्ञान की मान्यता है कि प्रकृति संतुलन ही उत्तम वर्षा का आधार है तथा पर्यावरण के इस सन्तुलन को प्रभावित करता है गोवंश। भौतिक विज्ञान हो या आध्यात्मिक विज्ञान, आयुवैदिक चिकित्सा पद्धति सभी का आधार भारतीय गोवंश है। गाय के रक्षण से केवल भौतिक विज्ञान ही नहीं आध्यात्म विज्ञान की पुष्टि होती है । तभी तो भारतीय ऋषियों ने प्रत्येक युग में गाय के महत्त्व को प्रतिपादित किया है तथा गोवंश रक्षण हेतु अनुष्ठान और आवश्यकता पडने पर आन्दोलन और अभियान भी चलाये हैं।
सांस्कृतिक, आर्थिक, चिकित्सकीय, धार्मिक एवं आध्यात्मिक आधार के साथ-साथ वैज्ञानिक तथ्यों, तमाम शोध और अनुसन्धानों के परिणाम स्वरूप यह सिद्ध हो चुका है कि यदि विश्व को विनाशकारी प्रलय से बचाना है तो भारतीय गोवंश का रक्षण अनिवार्य है। भारतीय संविधान, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायालय और जन आस्थायें गोवंश के महत्त्व को समय-समय पर रेखांकित करती रही हैं।

इतिहास साक्षी है कि गाय और गौवंश की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने बहुत संघर्ष किया और हर युग में हमारे पूर्वजों ने गोपालन और गोवंश के संरक्षण की प्रवृत्ति को न केवल प्रोत्साहन दिया बल्कि उसे सदैव जीवित रखा। गोवंश सृष्टि के आदिकाल से त्रैलोक्य पूज्या, विश्ववन्द्य माता एवं प्राणीमात्र की प्राणाधार हम भारतवासियों की तो जीवन रेखा है।

गाय और गौवंश की रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने बहुत संघर्ष किया और हर युग में हमारे पूर्वजों ने गोपालन और गोवंश के रक्षण की प्रवृत्ति को न केवल प्रोत्साहन दिया बल्कि उसे जीवित रखा। किन्तु देश स्वतंत्र हो जाने के बाद से भारतवर्ष का गोवंश निरन्तर घटता रहा। आज अपने देश की आबादी के अनुपात में जितना गोवंश चाहिए उतना नहीं है, जिसके कारण देश में विनाष के सारे संकेत स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। कृषि पर आधारित हमारी समृद्धि चारों ओर से चुनौतियों से घिर गई है और कृषि का मुख्य आधार गोवंश विनाश के कगार पर है, जबरदस्त संकट का काल सम्मुख उपस्थित हैं ।

गोरक्षण का कार्य परमपवित्र कार्य है, प्रत्येक भारतीय को इस पुनीत यज्ञ में अपना योगदान करना चाहिए।